मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 181

समर की नज़र से

बोतल को घूमते-घूमते अभी ठीक से थमने भी नहीं मिली थी कि मेरा दिल उछलकर गले में आ अटका। उसकी नोक सीधे कीरन पर जाकर रुकी, जो घेरा बनाकर बैठे हम लोगों में मेरे ठीक सामने था। उसकी गहरी, काली आँखें उसी तीखेपन से मेरी आँखों में गड़ी थीं कि कमरे की हवा अचानक ज़रूरत से ज़्यादा गर्म लगने ल...

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